ज्योतिष में ब्रह्मलोक व मोक्ष प्राप्ति योग
कुण्डली में ग्रहों की स्थिति को देखने उपरांत यह निर्णय किया जा सकता है की मनुष्ये इस जन्म को भोगने के बाद मोक्ष को प्राप्त करेगा या नहीं। मोक्ष से भाव चौरासी लाख योनि में न जा कर यह जीवन भोगने के बाद परमपद प्राप्त करेगा या नहीं।
- यदि 11 वे भाव में सूर्य-बुध हों, 8 वे भाव में राहु और नवम भाव में शनि हो तो जातक इस जन्म में शुभ कर्म करता हुआ म्रत्यु के पशचात मोक्ष को प्राप्त करता है ऐसा ऋषिओं का कथन है।
- गुरु लग्न में हो, शुक्र सप्तम में, कन्या राशि का चन्द्रमा हो यां धनु लग्न में मेष का नवांश हो तो जातक म्रत्यु के पश्चात परमपद को प्राप्त करता है।
- कुण्डली में अष्ठम भाव आयु और म्रत्यु का भाव है, गुरु , शुक्र और चन्द्र तीनो अगर अष्टम भाव पर शुभ दृस्टि डालतें हों तो जातक म्रत्यु के पश्चात मोक्ष प्राप्त करता है।
- लग्न में गुरु-चन्द्र , चौथे भाव में उच्च का शनि,सातवें भाव में उच्च का मंगल हो तो जातक म्रत्यु के पश्चात मोक्ष प्राप्त करता है।
- अष्ठम भाव पर शनि की पूर्ण दृस्टि हो और 8 वे भाव में मकर यां कुम्भ राशि हो यानि मिथुन या कर्क लग्न हो तो जातक म्रत्यु के पश्चात मोक्ष प्राप्त करता है।
यह योग कुण्डली में उपस्थित हों मगर इस जन्म में बुद्धि भ्रस्ट होने पर मनुष्य पाप कर्म करेगा तो उसे मोक्ष की प्राप्ति ना होगी ऐसा ऋषिओं का कथन है।
..... कर भला हो भला .....
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