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Sunday, 5 July 2020

#लाल किताब में जन्मपत्री कै चोथे घर यानी सुख भाव बारे संक्षिप्त फल।

  • कुण्डली के चोथे भाव को लाल किताब में चंद्रमा का घर कहा गया है। चंद्र इस घर मै उच्च का होता है।
  • चोथे भाव में चन्द्र ओर बृहस्पति होना शुभ फल दायक ही होता है।
  • माता पिता से क्या प्राप्त होगा ओर उनके साथ सम्बन्ध कैसे रेहेंगे? इस भाव से ही देखा जाता है।
  • मानसिक शांति का सम्बन्ध भी इसी घर से देखा जाता है।
  • चोथे घर से उम्र का दूसरा हिस्सा 25-50 साल की आयु तक का फल भी देखा जाता है।
  • दिशा के बारे में यह घर पूर्व-उत्तर दिशा का सूचक है।
  • चोथे घर में शुभ ग्रह हों तो कपड़े सम्बन्धी कार्य लैब देते हैं।
  • चोथे भाव में अशुभ ग्रह माता की मानसिक ओर शारीरिक सेहत को ख़राब करते हैं।
  • यहाँ पर शुभ ग्रह हों तो जिन फलों में रस होता है ऐसे पोधे लगाने से लाभ होता है।फलदार पोधों से भाव 
  • आम, तरबूज़, अंगूर इत्यादि।
  • यदि स्त्री की कुंडली में चोथे भाव में अशुभ ग्रह हों तो बच्चा होने के वक्त या गर्भावस्था में बुरा प्रभाव पड़ेगा।
  • चोथे भाव में चंद्रमा हो तो रात्रि मैं किए कार्य शुभ फल देते हैं।

Saturday, 4 July 2020

कुण्डली के तीसरे भाव से घर में सुख -सुविधा के सामान बारे ज्ञान मिलता है

कुण्डली के तीसरे भाव का सम्बन्ध  मकान के अंदर रखे  सुख सुविधा ओर आराम के सामान से भी है।
तीसरे भाव में शुभ ग्रह होने से व्यक्ति के घर में आराम का सामान काफ़ी मात्रा में होता है मगर शर्त यह है की  उन ग्रहों पर पापी ग्रहों का प्रभाव नहीं होना चाहिए।
तीसरे भाव में अगर अशुभ ग्रह हों तो घर में आराम के साधनों में कमी आ जाती है।
तीसरे भाव से सम्बन्ध घर में रखे हथियारों जैसे तलवार, पिस्तोल आदि।
तीसरे भाव में शुभ ग्रह होने से तेज धार ओर टूटे  हथियारों को घर में मत रखें।
यहाँ शुभ ग्रह होने से घर में फलों वाले पेड़ शुभ फल दायक होते हैं।
तीसरे भाव में अशुभ ग्रह हों तो फलदार पोधे  लगाने अशुभ फल ही देंगे।

Monday, 29 June 2020

ध्यान से पड़े ओर अमल करें । कर भला तो हो भला ।
चातुर्मास्य व्रत की महिमा

01 जुलाई 2020 बुधवार से 26 नवम्बर 2020 गुरुवार तक चातुर्मास है।
(1)आषाढ़ के शुक्ल पक्ष में एकादशी के दिन उपवास करके मनुष्य भक्तिपूर्वक चातुर्मास्य व्रत प्रारंभ करे। एक हजार अश्वमेघ यज्ञ करके मनुष्य जिस फल को पाता है, वही चातुर्मास्य व्रत के अनुष्ठान से प्राप्त कर लेता है।*
(2)इन चार महीनों में ब्रह्मचर्य का पालन, त्याग, पत्तल पर भोजन, उपवास, मौन, जप, ध्यान, स्नान, दान, पुण्य आदि विशेष लाभप्रद होते हैं।*
(3) व्रतों में सबसे उत्तम व्रत है – ब्रह्मचर्य का पालन। ब्रह्मचर्य तपस्या का सार है और महान फल देने वाला है। ब्रह्मचर्य से बढ़कर धर्म का उत्तम साधन दूसरा नहीं है। विशेषतः चतुर्मास में यह व्रत संसार में अधिक गुणकारक है।*
(4)मनुष्य सदा प्रिय वस्तु की इच्छा करता है। जो चतुर्मास में अपने प्रिय भोगों का श्रद्धा एवं प्रयत्नपूर्वक त्याग करता है, उसकी त्यागी हुई वे वस्तुएँ उसे अक्षय रूप में प्राप्त होती हैं। चतुर्मास में गुड़ का त्याग करने से मनुष्य को मधुरता की प्राप्ति होती है। ताम्बूल का त्याग करने से मनुष्य भोग-सामग्री से सम्पन्न होता है और उसका कंठ सुरीला होता है। दही छोड़ने वाले मनुष्य को गोलोक मिलता है। नमक छोड़ने वाले के सभी पूर्तकर्म (परोपकार एवं धर्म सम्बन्धी कार्य) सफल होते हैं। जो मौनव्रत धारण करता है उसकी आज्ञा का कोई उल्लंघन नहीं करता।*
(5)चतुर्मास में काले एवं नीले रंग के वस्त्र त्याग देने चाहिए। नीले वस्त्र को देखने से जो दोष लगता है उसकी शुद्धि भगवान सूर्यनारायण के दर्शन से होती है। कुसुम्भ (लाल) रंग व केसर का भी त्याग कर देना चाहिए।*
(6)आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को श्रीहरि के योगनिद्रा में प्रवृत्त हो जाने पर मनुष्य चार मास अर्थात् कार्तिक की पूर्णिमा तक भूमि पर शयन करें । ऐसा करने वाला मनुष्य बहुत से धन से युक्त होता और विमान प्राप्त करता है, बिना माँगे स्वतः प्राप्त हुए अन्न का भोजन करने से बावली और कुआँ बनवाने का फल प्राप्त होता है। जो भगवान जनार्दन के शयन करने पर शहद का सेवन करता है, उसे महान पाप लगता है। चतुर्मास में अनार, नींबू, नारियल तथा मिर्च, उड़द और चने का भी त्याग करें । जो प्राणियों की हिंसा त्याग कर द्रोह छोड़ देता है, वह भी पूर्वोक्त पुण्य का भागी होता है।
(7)चातुर्मास्य में परनिंदा का विशेष रूप से त्याग करें । परनिंदा को सुनने वाला भी पापी होता है।*
(8)परनिंदा महापापं परनिंदा महाभयं।*
*परनिंदा महद् दुःखं न तस्याः पातकं परम्।।*
(9)परनिंदा महान पाप है, परनिंदा महान भय है, परनिंदा महान दुःख है और पर निंदा से बढ़कर दूसरा कोई पातक नहीं है।’(स्कं. पु. ब्रा. चा. मा. 4.25)
(11)चतुर्मास में ताँबे के पात्र में भोजन विशेष रूप से त्याज्य है। काँसे के बर्तनों का त्याग करके मनुष्य अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करे। अगर कोई धातुपात्रों का भी त्याग करके पलाशपत्र, मदारपत्र या वटपत्र की पत्तल में भोजन करे तो इसका अनुपम फल बताया गया है। अन्य किसी प्रकार का पात्र न मिलने पर मिट्टी का पात्र ही उत्तम है अथवा स्वयं ही पलाश के पत्ते लाकर उनकी पत्तल बनाये और उससे भोजन-पात्र का कार्य ले। पलाश के पत्तों से बनी पत्तल में किया गया भोजन चन्द्रायण व्रत एवं एकादशी व्रत के समान पुण्य प्रदान करने वाला माना गया है।*
(12)प्रतिदिन एक समय भोजन करने वाला पुरुष अग्निष्टोम यज्ञ के फल का भागी होता है। पंचगव्य सेवन करने वाले मनुष्य को चन्द्रायण व्रत का फल मिलता है। यदि धीर पुरुष चतुर्मास में नित्य परिमित अन्न का भोजन करता है तो उसके सब पातकों का नाश हो जाता है और वह वैकुण्ठ धाम को पाता है। चतुर्मास में केवल एक ही अन्न का भोजन करने वाला मनुष्य रोगी नहीं होता।*
(13)जो मनुष्य चतुर्मास में केवल दूध पीकर अथवा फल खाकर रहता है, उसके सहस्रों पाप तत्काल विलीन हो जाते हैं।

Wednesday, 17 June 2020


लाल किताब नियम 'टकराव के ग्रह' ओर 'बुनियादी ग्रह'।व्याकरण 
टकराव के ग्रह 
लाल किताब में फलादेश के लिए टकराव के ग्रह को समझना बहुत ज़रूरी है।जन्म कुंडली में या वर्ष फल में जब एक ग्रह से दूसरा छटे-आठवें स्थान पर हो तो उन में टकराव हो जाता है।यह ग्रह आपस में मित्र भी हों तब भी आपस में दुश्मनी ही करेंगे।मानो एक ग्रह भाव 1 में हो तो दूसरा 8 भाव में आ जाए तो पहले भाव में बेठ ग्रह आठवें वाले ग्रह की जड़ ही काट देगा।यानी आठवें घर में बेठे ग्रह के लिए अशुभ ही होगा।मगर आठवें भाव वाला ग्रह पहले वाले ग्रह पर कोई असर ना डालेंगे।किसी भी कुंडली का टकराव के ग्रह को ध्यान में रख कर फलादेश करने से सटीक फल मिलतें हैं।
बुनियादी ग्रह
जब एक ग्रह दूसरे से नवम-पंचम में हो तो ऐसे ग्रह चाहे शत्रु हों या मित्र एक दूसरे के सहायक ही होते हैं।वर्ष कुंडली में 1-5,  2-6 ,3-7 ,4-8 ,5-9 ,6-10 , 7-11 , 8-12 में बेठे ग्रह का सहायक ही होगा।

Tuesday, 19 May 2020

उपरत्नों का प्रयोग ओर विशेष गुण


रोगों में इन उप रत्नो को शुभ महूरत में धारण करने से लाभ होता देखा गया है।

सुनेला - गले के रोग, ज्वर, मासिकधर्म, नपुंसकता, दांत कस्ट में लाभ होता है

चंद्रकांत मनी- स्मृति, मानसिक शांति, अनिद्रा, दिल के रोग में लाभ होगा।फ़िरोजा - आने वाले गम्भीर ख़तरों से रक्षा करता है।कामशक्ति में वृद्दि  करता है।ओपल - स्मरण शक्ति में वृद्दि करता है।दानाफिरेगा- गुर्दे के रोगों को दूर करता है।लाजवर्द - चर्म रोगों में उपयोगी है। 

Sunday, 17 May 2020

नाबालिग़(MINOR) टेवा क्या होता हाँ?

नाबालिग़(MINOR) टेवा उसे कहते हेन जब बन्ध मुठी के खाने यानी केंद्र भाव 1,4,7,10 खाना ख़ाली हों या उन में पापी ग्रह शनि, राहु ओर केतु ही हों या अकेला बुध ही हो तो यह कुंडली नाबालिग़ टेवा होगा। बच्चे की क़िस्मत का हाल बारह साल की उम्र तक शक्की ही होगा ।
लाल किताब का यह असूल हाँ की ऐसे टेवा में पहले साल में सातवें भाव के ग्रह का असर, दूसरे साल में चोथे भाव के ग्रह का, तीसरे साल में नोवे खाना के ग्रह का,चोथे साल में दसवें, पाँचवें साल में ग्यारहवें, छटे साल में तीसरे, सातवें साल में दूसरे खाना में बेठे ग्रह का,आठवें साल में पाँचवें भाव में बेठे ग्रह का,नोवें साल में छटे भाव में बेठे ग्रह का, दसवें साल उम्र में बाहरवें भाव में बेठे ग्रह का, 11वे साल की उम्र में पहले घर के ग्रह का, 12वें साल उम्र में आठवें घर में बेठे ग्रह का उपाय करना होगा।
जो खाना ख़ाली हाँ उस की राशि के स्वामी ग्रह का उपाय करना होगा।

Thursday, 7 May 2020

आंख फड़कने का फल

दाहिनी आंख या भौहँ फड़के तो सब अभिलाषा पूर्ण होती है। बाईं आंख या भौहँ फड़के तो शुभ समाचार मिले। दाईं आंख के ऊपर की पलक फड़कती है तो धन कीर्ति आदि की वृद्धि होती है। नीचे की पलक फड़के तो अशुभ समाचार मिले।
बाईं ऑंख की ऊपरी पलक फड़कती है तो किसी दुश्मन से अधिक दुश्मनी हो सकती है। नीचे की पलक फड़कती है तो किसी से बेवजह बहस हो सकती है और अपमानित होना पढ़ सकता है। बाईं आँख की नाक की ओर का कोना फड़कता है तो शुभ होता है ,पुत्र प्राप्ति की सूचना मिल सकती है या किसी प्रिय व्यक्ति से मुलाकात हो सकती है।
पुरुष की दाईं आँख फड़कना शुभ फल देता है ,मगर स्त्री की दाईं आँख फड़कना अशुभ माना जाता है।
दोनों आँखें अगर एक साथ फड़कती हैं तो औरत और पुरष दोनों के लिए शुभ होता है। 


Monday, 4 May 2020

लाल किताब में किस रंग का पेन करता है उपाय ?


कुण्डली में बुध-शनि मुश्तरका का फल उम्दा  होगा अगर गुरु मन्दा न हो और पेन नया पास रखें , जब तक पेन में रुकावट ना आये तब तक सब बढ़िया रहे। 

मंगल-गुरु इकठे उत्तम असर हर तरफ से बढ़िया पीला रंग इस्तेमाल करें।
कुण्डली में बुध उत्तम तो विधाता की तालीम और अगर बुध-राहु उच्च तो सफेद हाथी निहायत उत्तम अगर नीच मसलन बुध 3 , 8 , 9 ,12 और राहु 1 , 5 ,7  ,8 ,11 तो जेलखाना या पागल खाना हर तरफ से मन्दा हरे रंग की कलम का इस्तेमाल करें।
मंगल-बुध शेर के दांत मगर शहद में रेत की तरह हरे रंग की कलम मुबारिक।
बुध उत्तम, बुध राहु शक्की, सूर्य-बुध उत्तम दो रंगी कलम जिस में लाल रंग शामिल हो।
मगल-केतु अगर कुण्डली में मनहूस तो लाल रंग का इस्तेमाल मत करें।


Monday, 20 April 2020

पर्वत योग
जन्मपत्री में जब सप्तम और अष्ठम में कोई ग्रह न हो और लग्नेश, व्ययेश केंद्र भाव में हों तो व्यक्ति अनुभवी राजनेता या उच्च पदवी प्राप्त करता है। 

Thursday, 9 April 2020

कब होगा अन्त कोरोना का कहर ? ज्योतिष विश्लेषण

अगर ख़बरों की माने तो कोरोना वायरस का पहला मरीज नवम्बर 17, 2019 को चीन के वुहान शहर में मिला था। इस दिन की कुण्डली में धनु लग्न और मिथुन राशि थी लग्न में ब्रहस्पति-शनि-प्लूटो की युति और सप्तम में चन्द्रमा-राहु की युति यानि ग्रहण। मंगल-बुध एकादश भाव में और सूर्य-शुक्र बारवें भाव में विराजमान है।इस कुण्डली में तक्षक नामक  कालसर्प योग बन रहा है। धनु लग्न की कुंडली में धन भाव, सप्तम और अष्टम के स्वामी शनि, बुध और चन्द्र ग्रह मारक प्रभाव भी देते हैं। केन्द्र में गुरु केन्द्राधिपति दोष से ग्रसित है।
28 नवम्बर 2019 तक  ब्रहस्पति-बुध-चन्द्र दशा चल रही थी सप्तम और अष्ठम इस कुण्डली में मारक ग्रह हैं।
15 जनवरी 2020 तक ब्रहस्पति-बुध-मंगल प्रत्यंतर दशा मंगल व्यय भाव और अग्नि का स्वामी इस लिए प्रभाव तेजी से शुरू हुआ।
 18 मई 2020 तक ब्रहस्पति-बुध-राहु  प्रत्यंतर दशा में प्रभाव ज्यादा रहे।
इस दशा के बाद स्थिति सामान्य होगी क्योंकि ब्रहस्पति-बुध- ब्रहस्पति प्रत्यंतर दशा में प्रभाव खत्म होना शुरू होगा। 

Saturday, 4 April 2020

प्रात:काल अपनी हथेलिओं का तीन बार दर्शन क्यों पुण्यदायक माना जाता है ?

सामुंद्रिकशास्त्र में वर्णन है की प्रात:काल अपनी हथेलिओं का दर्शन पुण्यदायक, मंगलप्रद, तथा कई तीर्थों के दर्शन सामान है। सुबह अपनी दोनों हथेलिओं  मातृरेखा, पितृरेखा, और आयुरेखा क्रमश गंगा, यमुना और सरस्वती त्रिवेणी दर्शन हो जाता है। इसलिए सुबहे उठकर बिस्तर पर ही हथेलिओं को तीन बार चूमे जिससे पितृरेखा के स्वामी ब्रह्मा, मातृरेखा के स्वामी विष्णु, आयुरेखा के स्वामी शिव है।हाथ की चारों दिशाओं को इन्द्र, यम, वरुण, कुबेर का प्रतीक माना गया है। सुबह दिन का पहला काम जब सब देवताओं को अपनी हथेलिओं पर देखना और चूमना होता है तो सा देवता खुश हो कर आशीर्वाद देतें हैं।  

Thursday, 2 April 2020

ज्योतिष और भारतीय शेयर बाजार 2020-21

ज्योतिष में शेयर बाजार से  लाभ या हानि को देखने के लिए जन्मपत्री के धन भाव(Money), सुत भाव(Share market, lottery), अष्ठम(Sudden gain or loss) एकादश(Profit) और द्वादश(Expenditure) और बुध, सूर्य, राहु, चंद्र और दशमांश से विचार किया जाना चाहिए।चन्द्र ग्रह अगर कुण्डली में कमजोर हो या कृष्ण-पक्ष का जन्म हो तो शेयर मार्किट से ज्यादा लाभ नहीं होता। जन्मपत्री और वर्षफल में अगर 2, 7, 11 वे  भाव का स्वामी त्रिक भावों 6, 8, 12 में हो तो लाभ की जगह हानि की सम्भावना ज्यादा होगी। 
जन्मपत्री में 2 , 5 और 11 भाव का आपस में सम्बन्ध हो तो शेयर बाजार से लाभ हो सकता है। 
2 और 5 वे भाव के स्वामी आपस में राशि परिवर्तन करें तो भी शेयर बाजार से लाभ होता देखा जाता है। 
भारत की आजादी 15 अगस्त 1947 को हुई थी।  आजादी के वक्त की कुंडली में वृष लग्न था और लग्न में राहु, सप्तम में केतु, धन भाव में मिथुन का मंगल, पराक्रम भाव में सूर्य,चंद्र,शुक्र,शनि, बुध पांच ग्रह और छटे घर में गुरु विराजमान हैं। 
राहु 23 सितम्बर  2020 से मिथुन राशि से वृष में आयेगा। आज भारत वर्ष की कुण्डली में धन भाव में बैठा है जिससे शेयर बाजार में गिरावट रहेगी तथा वृष राशि में होने से उतार-चढ़ाव होते रहेंगे। 
राहु जब भारत वर्ष कुण्डली में 12 वे स्थान पर आये तो भी शेयर बाजार में मजबूती नहीं आएगी। सोच समझ कर निवेश करें। 
राहु गोचर में 30 अक्टूबर 2023 को मीन में आने पर भारत वर्ष की कुण्डली में आने से निवेशकों को कुछ लाभ होना शुरू होगा। 
राहु ग्रह मिथुन और वृष राशि में होए से E,U, A, O, V, K, H, R,S, T अक्षर से शुरू नाम की कंपनियों में निवेश करने से लाभ होगा।जिन देशों के नाम का पहला अक्षर इन नामों से शुरू होता है वहाँ इतनी गिरावट नहीं होगी। 
यह ज्योतिषीय गणना है इसलिए निवेश करने से पहले अपनी जन्मपत्री  किसी ज्योतिषी को दिखा कर परामर्श कर लें।