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Saturday, 17 August 2019

विवाह में विलम्ब: ज्योतिष कारण और उपाय

जन्म कुंडली के सप्तम भाव से विवाह के बारे जाना जाता है। शुक्र और बृहस्पति विवाहिक जीवन के कारक ग्रह माने जाते है। यदि राहु,शनि,केतु,सूर्य की कुदृस्टि सातवे भाव पर हो तो भी विवाहिक जीवन प्रभावित होता है। 

लग्न कुंडली के पहले, चौथे, सातवे, अष्ठम और बाहरवें भाव में मंगल भी मांगलिक दोष बनाता है जिस कारन से भी विवाह में विलम्ब हो सकता है। विद्वानों का मत है की मंगली दोष होने पर 27 या 28 वर्ष के बाद ही विवाह करना चाहिए।
सातवे भाव का स्वामी ग्रह अगर निर्बल,नीच राशिगत हो, अस्त या पापी ग्रहो द्वारा देखा जाता हो तो विवाह में विलम्ब होता है।
नवमांश में लग्न और सप्तम की सिथिति भी विवाह में देरी का कारण होती है।
जल्दी विवाह के लिए लड़के को केला का पौधा और लड़की को केली का पौधा अपने निवास स्थान से सप्तमेश की दिशा में किसी भी धर्मस्थान में वीरवार को लगा देना चाहिए। मगर सम्पूर्ण कुण्डली का विश्लेषण करने पर ही पूर्णफलदायक उपाय करने संभव होंगे। 

Friday, 16 August 2019

पैसे की बचत नहीं होगी अगर
घर या कारखाने में  पानी के नल से पानी बूंद-बूंद
कर टपकता हो या पानी की लीकेज हो। 

जेल योग
जन्मपत्री में अगर लग्न या  लग्न के स्वामी
और दशानाथ पर राहु की पूर्ण कुदृस्टि  दृस्टि हो तो
 जातक के  जेल जाने का योग बनता है 

Thursday, 15 August 2019

बुद्ध धर्म के चमत्कारी चिन्ह


पास रखने से होंगे यह फ़ायदे 


  • एंडलेस और एटर्नल नॉट( The Endless Knot) :इसे गले में पहनने से जीवन में सहजता आती है। 
  • वास(The Treasure Vase) व्यापार में उन्नति के लिए घर, दूकान या फैक्ट्री में रखें। 
  • लोटस फ्लावर ( The Lotus Flower): तरक्की के लिए घर ऑफिस में रखें। 
  • गोल्डन फिश (The Golden Fish): डर को मन से निकालने के लिए पास रखें। 
  • परसुल(The Parsol): दुर्घटनाओं से बचाव करता है। 
  • कोंच शैल( The Conch Shell): इसे पास रखने से जीवन में अँधेरा दूर करता है , जीवन का असली मकसद पूरा होता है। 
  • धर्म व्हील(The Dharma Wheel):  इसे पास रखने से जीवन को सही दिशा मिलती है। धर्म का असली मकसद पूरा होता है। 
  • बैनर ऑफ़ विक्ट्री(The Banner Of Victory): पांच विकारो से धारण करने वाला बचा रहता है। 



पश्चिम-दक्षिण कोणे में बाथरूम बनाने से पाताल में रहते राक्षक बलवान होते है जिससे घर में कला कलेश, बीमारयां और अशान्ति रहती है। 

Wednesday, 14 August 2019

अनुभूत ज्योतिष सूत्र


धन योग 

कुंडली में जब 2 रे भाव का स्वामी 2, 5, 11 वे भाव में या 5 वे भाव का स्वामी2, 5 वे में  हो।
9 भाव का स्वामी ग्रह जब 9, 11 में हो तो धन की कमी जातक को नहीं होती।

सरल योग 

6, 8 या 12 भाव का स्वामी अगर 6, 8, 12 में कहीं भी बैठा होने से मनुष्य मजबूत शरीर वाला, दीर्घायु, दानवान, विद्यावान, पुत्र सुख वाला होगा।

दुर्योग 

10 वे भाव का स्वामी अगर 6,8,12 में सिथित हो तो सफलता साथ नहीं देती। 

Tuesday, 13 August 2019

वशीकरण सफल क्यों नहीं होता ?

लड़की और लडके की चन्द्रमा राशि ( ग्रेहमैत्री) 
की आपस में मित्रता ना हो तो वशीकरण,
 आकर्षण प्रयोग सफल नहीं होते। 

विवाह के लिए अशुभ समय

किस आयु में किया विवाह शुभ फल नहीं देता ?, इस संबंध में लालकिताब में बहुत स्पष्ट मत मिलते है साथ में अनुभव के आधार पर विश्लेषण किया जा रहा है। 

  • सूर्य-शुक्र की युति कुण्डली में हो तो 22 से 25 वर्ष की आयु में विवाह मत करे ऐसा तब होगा जब सूर्य शुक्र के लिए विषैला प्रभाव दे रहा हो। 
  • अगर कुंडली के भाव 1 यानि लग्न में चन्द्रमा अकेला हो तो 22 वे या 27 वे वर्ष आयु में विवाह न किया जाए। 
  • राहु भाव नंबर 7 में हो तो 21 वर्ष आयु में शादी मत करें अच्छा फल नहीं मिलेगा। 
  • शुक्र भाव नंबर 1, 6, 8, 9 में हो तो विवाह 25 वे वर्ष में किया जाए तो फल मन्दा ही होगा। 
  • सूर्य अगर कुण्डली के 2 रे 4 थे 6 वे 8 वे या 12 वे भाव में हो तो विवाह ऐतवार को मत करें। 
  • शनि भाव 6 में हो और शुक्र 2 या 12 में हो तो 18-19 वर्ष में  किया विवाह अच्छा फल नहीं देता। 
  • शुक्र लग्न में हो तो विवाह 25 वे वर्ष में मत करे।  

लग्न में राशिओं का फल



  • मेष राशि लग्न में हो तो जातक महत्वकांशी, तर्क वितर्क करने वाला, दुःसाहसी, कठोर और जल्दी उतावला होने वाला, पित रोगी, अधीनता  स्वीकार न करने वाला हठी होगा। 
  • वृष राशि का लग्न वफादार,हठधर्मी, सजवाट पसन्द करने वाला, सहनशील, औरतों की तरफ आकर्षित होने वाला होगा। 
  • मिथुन राशि लग्न में हो तो खुश रहने वाला मगर बेचैन, अच्छा स्वास्थ्य, घूमने फिरने का शौकीन, हिसाब-किताब का पक्का होगा। 
  • कर्क लग्न में जातक कल्पनाशील,डरपोक,भावुक,सवेंदनशील, वफादार, स्थान परिवर्तन करने वाला होगा। 
  • सिंह लग्न में व्यक्ति अति महत्वकांशी, विशाल ह्रदय, स्पस्टवादी, सट्टा लाटरी का शौकीन, कल्पनाशील होगा। 
  • कन्या लग्न हो तो जातक आध्यात्मिक, विचारशील, शांत, तनावरहित, सफाईपसन्द, प्रतिभावान होगा। 
  • तुला लग्न में व्यक्ति दयालु और वीर, सिनेमा या नाटक में हिसा लेने वाला, आशिकी करने वाला, सजधज़ कर रहने वाला होगा। 
  • वृश्चिक में जातक निडर, मुंहफट और दोटूक जवाब देने वाला, शकी सवभाव, गुप्त विद्या, मेहनती, बुद्धिमान,आलोचक होगा। 
  • धनु लग्न में जातक अधीर, धार्मिक, सत्यवादी, दोहरी मानसिकता, लालची, उत्साही, सुन्दर शरीर वाला होगा। 
  • मकर लग्न में जातक कंजूस, जल्दी क्रोधित होने वाला,विचारशील, नीच लोगों से लाभ प्राप्त करने वाला होगा। 
  • कुम्भ लग्न का जातक अंतर्ज्ञानि, दयालु, बुद्धिवान,  हिम्मंत न हारने वाला, सावधान, विचारशील होगा। 
  • मीन लग्न का जातक शांत, बिज़नेस में निपुण, आरामपसंद, दो टूक बात करने वाला, सामाजिक कार्यों में रूचि रखने वाला, दूसरों की बातों में जल्दी आने वाला होगा।  

Sunday, 11 August 2019

शनि ग्रह अगर कुण्डली में कमजोर है तो 

आप की चोरी जल्दी पकड़ी जाएगी 


Thursday, 8 August 2019

मूल्येवान वस्तुओं की प्राप्ति का समय निर्धारण

मनुष्ये की लालसा होती है की उसे  सब तरह  की सुंदर,आरामदेह और विलास की वस्तुओं मिलती रहें जैसे  की आलीशान घर, कार ,जेवरात इत्यादि।मूल्यवान वस्तुयें  किस ग्रह की महादशा  या अन्तर्दशा में प्राप्त होंगी  ? जन्मपत्री से यह जाना जा सकता है की किस ग्रह की दशा, अन्तर्दशा या पर्यन्तर्दशा में आप को घर, बंगला, कार, जमीन जायदाद की प्राप्ति हो सकती है। 

जन्मपत्री में मंगल, शुक्र और शनि ग्रह का विश्लेषण करने से, इन ग्रहों के साथ बैठे ग्रहों, इन पर किन ग्रहों की दृस्टि है,  चतुर्थांश कुण्डली में लग्न की स्थिति, चुतर्थांश के सुख भाव की स्थिति, लग्न और चतुर्थ और इस के स्वामी की स्थिति का विश्लेषण करने से यह जाना जा सकता है की किस दशा, अंतर्दशा या प्रत्यन्तर्दशा में मूल्येवान वस्तुय प्राप्त होंगी।
चतुर्थांश कुण्डली में मंगल और शुक्र के  स्थान बल से भी मूल्येवान वस्तुओं की प्राप्ति का काल निर्धारण किया जा सकता है।
कारक ग्रह की स्थिति को भी ध्यान में रखना चाहिए। योगकारक ग्रह को बलवान करने से मूल्यवान वस्तुओं को किसी हद तक प्राप्त किया जा सकता है। 

Monday, 5 August 2019

जम्मू-कश्मीर का भविष्य: ज्योतिष विवेचन

नीच का मंगल बढ़ाएगा मुश्कलें 

जम्मू-कश्मीर रिऑर्गनिज़शन बिल राज्य सभा दिल्ली में 5 अगस्त, 2019 को  शाम 6 :50 बजे पास किया गया।इस में धारा 370 को ख़त्म करने का प्रावधान है।  इस समय की कुण्डली में नाभ यानि महा पदम नामक  काल सर्प दोष बनता है।जिस कुण्डली के छटे भाव में राहु होता है इस में लोग अपनी जाति के लोगों से ही परेशान रहते है , झूठे आरोप बहुत लगते है। कार्यों में बाधा आती है। इस काल में हस्त नक्षत्र था जिस  के होने से लोग मिथ्यावादी,  चोर बुद्धि , छूठे, व्यर्थ साहसी बनाते है।   जिस से राहु की अवधि 42 साल तक अड़चने ज्यादा आएंगी। सूर्य 7 वे भाव में नीच के मंगल के साथ बैठा होने से मार काट बढ़ सकती है।  चन्द्रमा के आगे पीछे कोई ग्रह न होने से केमन्द्रम योग बनता है। मानसागरी ग्रन्थ में केमन्द्रम योग के बारे में ऐसा लिखा गया है। 

केमन्द्रम भवति पुत्र कलत्र हीनो।
देशांतरै वज्रति दुःख सभा भितप्त।
ज्ञाति प्रमोद निरतो मुखर : कुचेलो ,
नीच : सदा भवति भीति युत शिचरायु :
यह योग जब कुण्डली में होता है तो ऐसी कुण्डली वाला कर्ज के बोझ से दरिद्र हो जाता है। जातक परिजात ग्रन्थ में कहा गया  है की इस योग के कारण कुण्डली में दूसरे कितने भी राजयोग और मंगलकारी योग हों वह अपना अच्छा फल नहीं दे पाते।
कुण्डली में चन्द्रमा की महा दशा केतु का अंतर् चल रहा है जिस से जम्मू-कश्मीर के लोगो में वहां से पलायन का मन बनेगा। आगे मंगल की महा दशा में शनि भंग रहेगी। हम अखण्ड भारत की कामना करते है । 

Thursday, 1 August 2019

विदेश यात्रा कब होगी ?

भारतीए लोगों में विदेश में जा कर बसने का सपना दिन प्रति दिन बड़ रहा है। विदेश में जा कर पढाई करने के बाद विदेश में परमानेंट रेजीडेंसी प्राप्त करने की इच्छा होना भी स्वाभाविक है। ज्यादातर लोग विदेश में शिक्षा, व्यापार, विवाह, देशाटन और घूमने फिरने(Tourist) के लिए जाते है।
राहु , चन्द्रमा और केतु यात्रा के कारक ग्रह है। कुण्डली के सप्तम, अष्ठम, नवम और द्वादश भाव से विदेश यात्रा देखी जाती है। लग्न  का संबंध सुखेश से हो और सुखेश(4th House) पापी ग्रह हो तो विदेश में जा कर बसने का योग बनता है।
राहु यदि 7, 8 ,9 , 12 भाव में हो तो विदेश जा कर रहने का सपना पूरा होता है।
पद लग्न और उप पद लग्न से भी विदेश यात्रा का  ज्ञान मिलता है। 3, 9, और 12 वे भाव की दशा में विदेश यात्रा के प्रभल योग बनते है , लग्न,  चन्द्र लग्न , पद लग्न के और उप पद भाव से 12 वे भाव  के स्वामी की दशा  ही ज्यादातर विदेश यात्रा होती है।
पंचम, सप्तम, नवम, दशम भाव का संबंध अगर द्वादश भाव के साथ बने तो इन भावों के स्वामी की दशा में भी विदेश यात्रा होती है।